फिलहाल इस समय चल रहे नियमों की माने तो ईएमआई डेफरमेंट स्कीम की अंतिम डेट जुलाई 2020 में ही समाप्त हो रही है. लेकिन हाल ही में सीएनबीसी की रिपोर्ट के हवाले से ये जानकारी सामने आ रही है, कि इसे एक साल तक के लिए और बढ़ाए जाने की बात चल रही है. इसके साथ ही आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उज्ज्वला योजना के आधार पर एक प्रावधान है. इसके मुताबिक जब ग्राहक एलपीजी कनेक्शन लेते हैं, तो कुल लागत स्टोव के साथ 3,200 रुपये की होती है. 3,200 रुपये में से 1,600 रुपये की सब्सिडी साफ तौर पर सरकार की ओर से दी जाती है और बाकी 1,600 रुपये की रकम तेल कंपनियां देती हैं.

बता दें कि ईएमआई के तौर पर जो 1,600 रुपये की राशि बचती होती है, उसे ग्राहक तेल कंपनियों को देकर चुकाते हैं. हालांकि ईएमआई का स्ट्रक्चर इस प्रकार से बनाया गया है, जिसमें ग्राहक को किसी भी तरह की अलग राशि तेल कंपनियों को देने की जरूरत ही नहीं पड़ती है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब एलपीजी सिलिंडर को भराया जाता है, उस वक्त सब्सिडी से जुड़ी सारी रकम आपके खाते में डीबीटी के जरिए आती है. लेकिन इससे पहले ये पूरी रकम आपके खाते के बजाय तेल कंपनियों के पास जाती है. इसके बाद ये पैसा आपको तब मिलता है, जब आप 1600 रुपये की रकम का भुगतान कर देते हैं. ऐसे में एक बार ये रकम भरने के बाद सब्सिडी से जुड़ा पैसा आपके पास ही आता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *