ग्लोबल टाइम्स ने अपने लेख में लिखा कि गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत में राष्ट्रवाद ऊंचाइयों पर पहुंच गया है और चीन के प्रति भारतीयों की शत्रुता में भारी इजाफा हुआ है लेकिन चेतावनी स्वरूप भारत को अपने राष्ट्रवाद को ठंडा कर लेना चाहिए।

ग्लोबल टाइम अपनी करतूत से यही बाज नहीं आया बल्कि धमकी देते हुए और अपनी शेखी बघारते हुए कहा कि अगर चीन विरोधी भाव को नियंत्रित नहीं किया और कोई युद्ध हुआ तो भारत 1962 से भी ज्यादा अपमानित होना पड़ेगा।

चीन की मीडिया ने प्रधानमंत्री मोदी के आदेश का हवाला देते हुए कहा जिसमे उन्होंने भारतीय सैनिकों को जरूरत की स्तिथि में गोली चलाने की इजाजत दी है कि भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार ने सशस्त्र बलों को कोई भी आवश्यक कार्रवाई करने की पूरी आज़ादी दी है, और वह इस झड़प को कम करने के लिए दिखाई दिए जिसमें 20 भारतीय सैनिकों की मौत हो गई और वास्तविक सीमा रेखा के चीनी पक्ष में 70 से अधिक घायल हो गए।

ग्लोबल टाइम्स ने पीएम मोदी के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमे उन्होंने सर्वदलीय बैठक में कहा था कि ना कोई हमारी सीमा में घुस आया है ,ना घुसा हुआ है और ना ही किसी पोस्ट पर कब्जा हुआ है। हालाकि बाद में विदेश मंत्रालय ने उनके इस बयान पर सफाई जारी की थी जिसमें कहा गया कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया है।

चीनी मीडिया ने कहा चीन ने पीएम मोदी के इस बयान से दोनों देशों के बीच हुए तनाव को कम करने की तरफ एक कदम के रूप में देखा है।

चीनी मीडिया ने अपने लेख में गीदड़ भभकी देते हुए कहा कि भारत में तनाव के समय राष्ट्रवाद ऊंचाई पर जाना आम बात है लेकिन वह बस कुछ बोल सकते है हमारी तरफ गोली चलाने कि पहल नहीं करेंगे।

बीजिंग के एक मिलिट्री एक्सपर्ट वेई डोंगक्सू के हवाले से ग्लोबल टाइम्स ने रविवार को लिखा कि खुद पीएम नरेंद्र मोदी शब्दों के साथ खेल रहे हैं और वह खुद चीन के साथ जंग नहीं चाहते। वेई ने कहा कि चीन सैन्य क्षमता के मामले में भारत से मजबूत होने के साथ अंतरराष्ट्रीय प्रभाव के मामले में भी आगे हैं। एक अन्य एक्सपर्ट ने कहा कि भारत जब पाकिस्तान या किसी अन्य देश के मुकाबले में होता है तो राष्ट्रवाद के आधार पर कार्रवाई कर सकता है, लेकिन चीन के साथ ऐसी स्थिति नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा कि भले ही भारत के राष्ट्रवादी चीन की शक्ति को नजरअंदाज कर रहे हैं, लेकिन भारत की सरकार और सैन्य नेतृत्व को चीन की शक्ति का अनुमान है।

input source – reportlook

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