भारत और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प में हमने भले ही 20 जाबांज खो दिए। लेकिन इस दौरान भारतीय सैनिकों का जो पराक्रम रहा वह हर भारतीय को गौरान्वित करने वाला है। हिंसक झड़प के दौरान कमांडिंग ऑफिसर कर्नल बी. संतोष बाबू के शहीद होने के बाद बिहार रेजिमेंट के जवानों ने रौद्र रूप अपना लिया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अपने सीओ की शहादत से गुस्साये भारतीय सैनिकों ने एक-एक कर 18 चीनी सैनिकों की गर्दनें तोड़ डालीं। इस बारे में एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि इस दौरान कम-से-कम 18 चीनी सैनिकों के गर्दनों की हड्डियां टूट चुकी थीं और सिर धड़ से झूल रहे थे।

कमांडर के शहीद होने से गुस्साये भारतीय सैनिक इतने आक्रोश में आ गए कि सामने आने पड़ने हर चीनी सैनिक का वो हाल किया कि वह दोबारा सिर उठाने लायक नहीं बचे। जवानों का यह रौद्र रूप देखकर चीनी भागने को मजबूर हो गए और घाटियों में छिप कर अपनी जान बचाई। चीनी सैनिकों को खोज—खोज कर मारने के चक्कर में भारतीय सैनिक चीन के अधिकार क्षेत्र में घुस गए थे। जिन्हें बाद में चीन ने वापस लौटाया। वहीं भारत ने पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी पर संप्रभुता को लेकर चीन के दावे को नकार दिया है। साथ ही पड़ोसी देश को चेताते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि बढ़ा-चढ़ा कर व झूठे दावे करने की कोशिश किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं।

इस बारे में जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि गलवान घाटी पर चीन का दावा अतीत की स्थिति के खिलाफ है। गलवान की स्थिति ऐतिहासिक रूप से साफ है। यह घाटी भारत का हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा कि चीन की तरफ से अतिक्रमण के किसी भी प्रयास का हमेशा हमारी तरफ से सार्थक जवाब दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत की तरफ से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पार किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की है। भारतीय सैनिक लंबे वक्त से इस इलाके में गश्त करते रहे हैं।

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