प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सर्वदलीय बैठक में 17 राजनीतिक दलों को चीन के खिलाफ आगे की रणनीति तैयार करने के लिए आमंत्रित किया गया था. जिसमें पीएम मोदी ने रक्षा मंत्रालय को खुली छूट का फरमान जारी करते हुए चीन को उसी भाषा में जवाब देने की रणनीति तैयार करने का आदेश दिया था. वहीं बताया जा रहा है कि लद्दाख सीमा पर सेना के संख्या बल में भी इजाफा कर दिया गया है. चूंकि जिस तरह से चीन सीमा पर अपने सैनिकों का सैन्य अभ्यास करा रहा है. यह किसी युद्ध के संकेत से कम नहीं है. लेकिन अगर चीन की तरफ से इस बार किसी भी प्रकार की हरकत होती है तो भारतीय सेना को मिली छूट पूरा टक्कर देगी. हाल ही में वायु सेना के दो लड़ाकू विमानों को LAC पर तैनात किया गया है. जिसमें चिनूक और अपाचे हेलीकॉप्टर शामिल है. इन विमान की खास बात यह है कि इनमें आधुनिक हथियारों की तैनाती पहले से होती है. साथ ही युद्ध के समय में इन विमानों से हथियारों का आदान- प्रदान आसानी से किया जा सकता है.

बता दें कि चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद के बीच, तीनों रक्षा बलों को महत्वपूर्ण गोलाबारूद और हथियारों के अधिग्रहण के लिए प्रति परियोजना 500 करोड़ रुपये तक की खरीद करने की वित्तीय शक्तियां दी गई हैं. इन हथियारों और गोला-बारूद की आवश्यकता पूरी तरह से या सीमित संघर्ष छिड़ने की स्थिति में होगी.

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने ANI को बताया, “तीनों सेवाओं के उप प्रमुखों को जिन भी हथियारों की कमी या जरूरत महसूस होती है, उनकी आवश्यकताओं को तेजी से पूरा करने के लिए हर शस्त्र प्रणाली हासिल करने के हिसाब से 500 करोड़ रुपये तक की वित्तीय शक्तियां सेना को दी गई हैं.” बता दें कि सरकार की ओर से इन शक्तियों को देने के पीछे मुख्य मकसद किसी भी गंभीर स्थिति के लिए शॉर्ट नोटिस पर सेनाओं को तैयार रखना है.

वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूस दौरे से पहले सेना के साथ हुई बैठक में आधुनिक हथियारों को साथ ले जाने की मंजूरी दे दी है. जिससे चीन पर कंट्रोल किया जाना है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *